आगरा रैली : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव

नोटबंदी के फैसले के बाद प्रधानमंत्री मोदी की उत्तर प्रदेश में यह दूसरी रैली होगी , गाजीपुर की सफल रैली के बाद जिस तरह से मायावती ने रैली में आयी भीड़ को बिहार से लायी गयी बताया उससे पता चलता है की रैली पर काफी लोगों की निगाहें रहेंगी , नोटबंदी के लगभग ग्यारह दिन बीत चुके हैं जनता अभी बैंक और एटीएम के चक्कर लगा रही है ,मतलब अभी वो काफी नज़दीक से नोटबंदी के फैसले का मूल्यांकन कर रही है, रैली की सफलता या विफलता दोनों आगामी चुनाव को काफी दिलचस्प बनायेंगे ।
दलित राजनीति की दिशा तय करने वाले शहर से मायावती को काफी उम्मीदें हैं ,और यही कारण है कि मायावती ने काफी सोचकर आगरा को अपने पहली रैली के लिए चुना था ,रैली में लगभग एक लाख लोगों ने शिरकत किया था ,और रैली भीड़ के पैमाने में काफी सफल रैली मानी गयी थी।
आगरा जिला में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं , 2012 के समाजवादी लहर में भी बीसपी ने 6 सीटें जीती थी , लगभग 35.06 मतों के साथ, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 49 .03 % वोट मिले और वह 8 जगहों में पहले स्थान पर थी , बसपा को 27.31% वोट और सपा को 16.74% वोट मिले , जाहिर है बीजेपी अपने लोकसभा प्रदर्शन और बसपा अपने विधानसभा प्रदर्शन को दुहराना चाहेगी।
आगरा रैली की सफलता बीजेपी के लिए बहुत जरूरी है , यहाँ से दिया गया सन्देश न केवल उत्तर प्रदेश के लिए होगा बल्कि यह पुरे देश के लिए होगा , अगर प्रधानमंत्री कोई बड़ी घोषणा करते है तो इसमें भी आश्चर्य नहीं होगा ,अभी नोटबंदी के लिए लाइन में लगे लोगों के लिए हर शब्द का एक अलग महत्व है।
आगरा दलित राजनीति का केंद्र रहा है , लगभग 22 % दलित आगरा में है ,अल्पसंख्यक की संख्या लगभग 9 % है , मायवती दलित और मुस्लिम मतदाताओं को राजनीतिक रूप से एक सूत्र में बाँधने की कवायद ज़ोरों से कर रही है, परंतु समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भी अपना पूरा दम लगा रखा है ऐसे में मायावती की राह आसान नहीं है।

बीजेपी के पास अभी दो-दो सर्जिकल स्ट्राइक का क्रेडिट है और पार्टी पूरी तरह से इसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी परंतु अभी लगभग दो महीने से ज्यादा का वक़्त है चुनाव में और भावनात्मक मुद्दों को लंबे समय तक बनाये रखना आसान नहीं रहता है । पिछले कुछ चुनाव परिणामों से एक बात बहुत साफ़ नज़र आ रही है जनता विकास के मुद्दों को अब ज्यादा महत्व दे रही है और वह एक निर्णायक मत दे कर अपने मत के ताक़त को अभिव्यक्त कर रही है ,सार यही है की राजनीतिक दलों को विकास की बात जनता तक सीधे पहुँचाना होगा ,चुनाव प्रचार को परिणाम केंद्रित बनाना होगा |

आगरा की रैली में प्रधानमंत्री किस तरह से जनता को विकास का मंत्र देते है यह देखना काफी रोचक होगा। आगरा एक ऐतिहासिक शहर है , पर्यटकों के शहर में विकास का अकड़ा बहुत उत्साहजनक नहीं है , ऐसे में विकास  की रूपरेखा खिंचना और जनता तक पहुँचाना रैली का केंद्र बिंदु रहेगा ।

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